शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

basant....

हर बसंत का अपना उन्माद ,
हर बसंत की अपनी जवानी ,
हर बसंत का अपना सृजन ,
हर बसंत की अपनी कहानी।

घर पिछवाड़े आम बौर लिए भरपूर है ,
बाड़े के केले में भी फूल है ,
आंगन में गेंदे है महकते ,
छत  पे  पंछियों के झुण्ड है चहकते ,
तितलियों ने इंद्रधनुष है बनाये ,
लागे है इस बार बसंत कुछ ख़ास है। .......