हरे-भरे फसलो से भरपूर सीढ़ी नुमा खेत,
खेतो के बीच फलो से लादे आम के दरख्त (वृक्ष),
पास ही जंगल, उचे,गगन चुम्बी, चीड़ो से भरपूर,
उनमे कुछ ठूठ से सूखे खड़े,
दूर नज़र आती हिमालय की श्रृंखलाएं,
कुछ तो हे हरेभरे, कुछ वीरान बंजर,
उनके बीच कही कही, जल लिए, बादलो के,
अनगिनत टुकरे.
और उनके भी परे धुप में चमकती,
हिमालय की बर्फीली चोटियाँ.
कही कही पहाड़ी में दिख रही हे, खिलखिलाती धूप,
और कही पहाड़ी पर हे पूर्ण छाव।
और एक अकेली पहाड़ी, पर तो बरस रही हे,
रिम-झिम, रिम-झिम, एकसार बरखा की बूंदे।
घाटी में, बहती, कल-कल करती, नदी की स्वछ धारा।
और उप्पर नीले आसमान में,
दक्षिण-पूर्व के ऑर,
दो-दो इन्द्रधनुष, पूर्णरूपें,
समस्त जीवन रंगों को समाये हुए।
पश्चिम की ऑर ढलते सूर्य देव,
अपनी उर्जा को किरणों के रूप में,
बिखेरते हुए।
आसमान में कही कुछ घनघोर काली घटाये।
जैसे प्रकृति ने रचा हो कोई रंगमंच ,
समस्त नज़ारा रोम-रोम को,
रोमांचित किये जा रहा हे।
प्रकृति एवेम जीवन के समस्त पहलू,
एक हे साथ विरले हे देखने को मिलते हे।
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